विज्ञान ही देगा जीने की राह एंटी कोरोना वैक्सीन बनाने में मिली सफलता

 विज्ञान ही देगा जीने की राह एंटी कोरोना वैक्सीन बनाने में मिली सफलता

कोरोना महामारी के नाजुक दौर में उम्मीद की किरण दिखाई दी है। ऐसा लग रहा है कि जीवनदाई तारा अमरीका की ओर से उदित हो रहा है। कोई 39देशों में कोराना वायरस को नाकाम करने वाली वैक्सीन पर अनुसंधान चल रहा है। इनमे भारत भी शामिल है।भारत में अहमदाबाद में वैज्ञानिकों ने कोराना वायरस का जीनोम खोज लेने मै सफलता हासिल कर ली थी।जीनोम खोज लेने के बाद वैक्सीन खोजने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा था। शुरुआती जानकारी के अनुसार दुनिया के 39देशों में वैक्सीन के लिए 300शोध चल रहे है। इनमे से साठ चीन ओर 49अमरीका में चल रहे है। भारत के भी विज्ञान ओर प्रोद्योगिकी विभाग के अधीन विज्ञान ओर इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड के जरिए आईं आईं टी बॉम्बे कोराना के शरीर में प्रवेश को रोकने के लिए जेल तेयार करने के लिए अनुसंधान कर रहा है।

लेकिन इस सिलसिले के बीच अमरीका से उम्मीद का तारा उदय होता दिखाई दे रहा है। अमरीका के पीटर्स बर्ग इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन ने पिछले दो माह के दौरान अनुसंधान को तेज कर कोराना वायरस को संक्रमण को रोकने वाली वैक्सीन बना लेने में सफलता हासिल कर ली है। यह अनुसंधान वर्ष 2003से ही चल रहा था। अनुसंधान में यह साफ हुआ है कि कोराना वायरस भी सार्स एवम् मर्स फैलाने वाले वायरसों के परिवार से ही है। जो वैक्सीन खोजी गई है उसे पिक गो वाक नाम दिया गया है। अब तक के अनुसंधानों से यह साफ हुआ था कि कोराना वायरस के चारो ओर प्रोटीन के नुकीले अंकुश होते है जो कि मानव कोशिका में धस जाते है ओर इस तरह पूरा वायरस कोशिका में प्रवेश कर जाता है। करोना वायरस को कोशिका में प्रवेश दिलाने में कोशिका के अंदर बनने वाला फ्यूरिं न नामक एंजाइम सहायक होता है। अगर फ्युरिं न मदद न करे तो वायरस कोशिका में प्रवेश नहीं कर पाएगा।

कोशिका में प्रवेश करने के बाद वायरस अपनी संख्या बढ़ाने का काम कोशिका से करवाता है।
अमरीका के संस्थान ने जो वैक्सीन तेयार की है वह वायरस की शूलनुमा प्रोटीन को निशक्त कर देगी ओर वायरस के कोशिका में प्रवेश न कर पाने पर संक्रमण भी नहीं हो सकेगा। वैक्सीन के करीब दो माह में बाजार में आने की उम्मीद है। अभी तक इस वैक्सीन का चूहों पर प्रयोग सफल रहा है।चूहों को पहले वायरस से संक्रमित किया गया ओर बाद में वैक्सीन के प्रयोग से चूहों को स्वस्थ किया गया। वैक्सीन के कोई दुष्प्रभाव नहीं पाए गए है। इसलिए बहुत अधिक परीक्षणों की जरूरत नहीं होगी ओर इसे जल्दी ही बाजार में लाया का सकेगा। एक दिन में सौ वैक्सीन का उत्पादन किया जा सकेगा। इसे रखने के लिए कोल्ड चेन की जरूरत भी नही होगी। इसे गरम क्षेत्र में रखा जा सकेगा। वैक्सीन इंजेक्शन की तरह नहीं दी जाएगी बल्कि एक चिप कि तरह होगी जिसको शरीर मै लगा दिया जाएगा ओर चिप की छोटी सुइयों के जरिए वैक्सीन शरीर में जाएगी।

Sulekha Prasad

Sulekha Prasad

"Inspiringly inspired to inspire." Grounded journalist, hungry for growth and development, with the attitude of serving society with all that I have learnt so far and will learn.

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